
जालंधर (हितेश सूरी) : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(IMA) की पंजाब अध्यक्ष डा नवजोत दहिया ने योगगुरु बाबा रामदेव व उनकी पंतजलि योगपीठ के CEO आचार्य बालकृष्ण पर लोगों को गुमराह कर कोरोना के बारे में भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए DCP इन्वेस्टिगेशन जालंधर गुरमीत सिंह को शिकायत सौंप कर बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अपनी दवाएं बेचने के लिए वो प्रोपेगंडा कर रहे हैं। लोगों को इलाज न कराने के लिए प्रेरित कर मरीजों व मरने वालों की गिनती बढ़ा रहे हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पंजाब प्रेजिडेंट डॉ. नवजोत दहिया ने कहा कि बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ के CEO आचार्य बालकृष्ण कुछ दवाइयां तैयार कर दावा कर रहे हैं कि उससे कोरोना नहीं होता और अगर कोरोना हो तो वह ठीक हो जाता है। इस बारे में उनकी कई वीडियो वायरल हुई हैं, जिनमें कहा गया कि मरीज को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। वह घर में ही रहकर उनके बताए नुस्खे से ठीक हो सकता है। अगर ऑक्सीजन कम हो जाए तो अनुलोम विलोम व कपालभाति योग कर ऑक्सीजन पूरी की जा सकती है। सरकार गलत तरीके से लोगों को अस्पताल में भर्ती कर और उनका इलाज ना कर मार रही है। उन्होंने कहा कि यह सरासर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट का उल्लंघन है, क्योंकि इससे लोगों को गुमराह कर कोरोना महामारी को और फैलाया जा रहा है।
लोगों को अस्पताल में जाने से रोक कर उन्हें मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव लोगों को कह रहे हैं कि वह अस्पताल में जाने के बजाय मेरे पास आएं, मैं उन्हें ठीक कर करुंगा। इससे लोगों में सरकार और सरकार के द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल व मेडिकल संस्थानों के प्रति यकीन उठा रहा है। यह सब सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि कोरोना का कहर बढ़ाकर उनकी दवाइयां बिक सके। उनकी दवाइयों को सरकार की तरफ से मंजूर नहीं किया गया है। इससे पहले भी कोरोनिल नाम की दवाई को भी विज्ञापन के जरिए प्रचार कर बेचा गया, हालांकि बाद में सरकार ने इसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने एक चैनल पर स्पष्ट कहा है कि रेमडेसीविर व अन्य टीके लगाकर कोरोना के मरीजों को जानबूझकर मारा जा रहा है। इससे डॉक्टरी पेशे को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण खुद को कोरोना ठीक करने का माहिर बता रहे हैं, जबकि इस संबंध में उनके पास सरकार द्वारा जारी कोई लाइसेंस नहीं है। ना ही उनके कोरोना की दवा तैयार करने वाले किसी सरकारी एजेंसी के अधीन काम करने का कोई सबूत है।