
जालंधर (हितेश सूरी) : किसी किसी भी संगठन के विस्तार व सुदृढ़ता के लिए सदस्यों व पदाधिकारियों की सक्रियता, सहयोग व संवाद सर्वाधिक अहम भूमिका निभाते है। इसी के अनुरूप संगठन के विस्तार को ध्यान में रखते हुए लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एडवोकेट अरविंद धूमल की अध्यक्षता में चंडीगढ़ युनिट की बैठक हुई। इस सबंध में जानकारी देते हुए लघु उद्योग भारती पंजाब के उपाध्यक्ष विक्रांत शर्मा ने बताया कि आगामी 23 से 24 जुलाई को अहमदाबाद में हो रहे लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय अभ्यास वर्ग की तैयारियों के संबंध में चंडीगढ़ यूनिट की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें चंडीगढ़ के अध्यक्ष ओम अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष युद्धवीर कौड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल, महासचिव संजीव गुप्ता, संगठन सचिव अरुण शर्मा, सचिव अभिनव जैन सुनील बंसल व पंजाब के उपाध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंग सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। बता दे कि एडवोकेट अरविंद धूमल चंडीगढ़, पंजाब हरियाणा ,जम्मू कश्मीर के समन्वयक भी है। बैठक में संगठन के विस्तार व सदस्यों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से चंडीगढ़ के दो नए यूनिटों का गठन किया गया। जिसमें सर्वसम्मति से अक्षय चुघ को औद्योगिक क्षेत्र फेज़ एक व अवि भसीन को औद्योगिक क्षेत्र फेज़ 2 का संयोजक नियुक्त किया गया। उक्त दोनों संयोजक मौजूदा सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अपनी अपनी इकाइयों में नए सदस्यों को शामिल करेंगे। इस दौरान चंडीगढ़ व समीपवर्ती क्षेत्रों के उद्यमियों को पेश आ रही विभिन्न समस्याओं व वर्तमान परिपेक्ष में हो रहे परिवर्तनों के चलते पेश आ रही समस्याओं व उनके समुचित समाधान संबंधी विस्तृत चर्चा की गई । चंडीगढ़ के अध्यक्ष ओम अग्रवाल ने कहा कि भवन उपनियम बहुत पुराने हैं, वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप इन नियमों में संशोधन की आवश्यकता है परिवार और व्यापार कई गुना बढ़े हैं, उनके अनुरूप उद्योगों के विस्तार की ज्यादा गुंजाइश नहीं है । इन समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान, नियमों में बदलाव करके सार्थक कदम उठाए जाने चाहिए । श्री धूमल ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस संबंध में राष्ट्रीय पदाधिकारियों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन व केंद्रीय गृह मंत्रालय के ध्यान में आपकी समस्याओं व उनके समुचित समाधान संबंधी उचित कार्यवाही करवाने का सार्थक प्रयास किए जाएगे। उन्होंने कहा कि लघु उद्योग भारती कुटीर, सूक्ष्म ,मध्यम व लघु उद्योगों के सरंक्षण के लिए विशेष रूप से कार्यरत है इसी के चलते ही लघु उद्योग भारती देश का सबसे बड़ा औद्योगिक संगठन है। उनका संगठन स्वदेशी को बढ़ावा देकर विदेशी निवेश को नियंत्रित करने, रोजगारपरक ग्रामोद्योगों की स्थापना व पारंपरिक उद्योगों को सरंक्षण देने के लिए उत्साहवर्धक व सार्थक वातावरण बनाने के लिए समग्र नीतियां प्रदेशिक व राष्ट्रीय स्तर पर बनवाने के लिए कार्यरत है । इस दौरान उन्होंने वर्तमान परिपेक्ष में हो रहे परिवर्तनों की चर्चा करते हुए उनके समुचित समाधान के लिए कारगर कदम उठाने का भी आश्वासन दिया।